Sarcasm: Kanhaiya chatting with police constable

कन्हैया ने जेल में अपने जैसे ही एक बिहारी कॉन्सटेबल से बातचीत की l पेश है उस बातचीत के कूछ अंश l
कॉन्सटेबल - भइया तुम नारे लगाये थे का ?
कन्हैया - बिल्कुल लगाये थे l
कॉन्सटेबल - का बोले थे ?
कन्हैया - लाल सलाम l
कॉन्सटेबल - इ का होता है ?
कन्हैया - लाल मतलब क्रांति l
कॉन्सटेबल -कैसे ?
कन्हैया - लाल मतलब खून , क्रान्ति खून माँगती है l ऐसे
कॉन्सटेबल - भइया तुम तो खून खराबे की बात करते हो फिर ये गाँधीवादी तुम्हारा सपोर्ट काहे करते है ?
कन्हैया - ये गाँधीवादी मंदबुद्धि होते है l इनको पता नहीँ होता किसको सुपोर्ट करना है किसको नहीँ l
कॉन्सटेबल - अच्छा भइया तुमको किस से आज़ादी चाही ?
कन्हैया - पूंजीवाद , भेदभाव , जातिवाद से l
कॉन्सटेबल - हाँ भईय्या भेदभाव तो बहूत है india में और कहीँ नाहीं है ऐसा l हमसे निम्न जाति का छात्र हमसे निम्न अंक लेकर उच्च शिक्षा में प्रवेश पा लिया l और हम रह गये l
कन्हैया - नहीँ ये भेदभाव नहीँ है l ये तो संविधान में है l
कॉन्सटेबल - तो संविधान में ऐसा क्यों है ?
कन्हैया - क्योंकि संविधान जिस जाति के व्यक्ति ने लिखा था उसने अपनी जाति के लोगों को विशेष अधिकार दिये है l
कॉन्सटेबल - तो ये तो जातिवाद है l
कन्हैया - नहीँ तुम नहीँ समझोगे l संविधान कोई गोलवलकर ने थोड़े लिखा है , अम्बेडकर ने लिखा है l
कॉन्सटेबल - अच्छा भाई ये पूंजीवाद क्या है ?
कन्हैया - कुछ लोग सारी पूँजी पर कब्जा कर लेते है और गरीबो को कुछ नहीँ देते ऐही तो पूंजीवाद है l
कॉन्सटेबल - ये पूँजी कैसे ली उन्होने ?
कन्हैया - धोखे से l
कॉन्सटेबल - तो तुम बेवक़ूफ़ थे l
कन्हैया - सॉरी ताक़त से l
कॉन्सटेबल - तो तुम कमज़ोर थे l
कन्हैया - नहीँ सॉरी दिमाग़ से
कॉन्सटेबल - तो तुम बुद्धू थे l
कन्हैया - सॉरी मेहनत से
कॉन्सटेबल - तो तुम कामचोर थे l
कन्हैया - सॉरी ज्ञान से
कॉन्सटेबल - तो तूम अज्ञानी थे l तुम काहे नहीँ कमायें पैसा l
कन्हैया - तुम नहीँ समझोगे l हम बहूत ज्ञानी है l हम पैसा नहीँ कमाते जो लोग मेहनत से पैसा कमाते है उनके tax पर मौज उडाते है l
कॉन्सटेबल - भाई तुमको छात्र संघ का अध्यक्ष कौन बना दिया l
कन्हैया - jnu के छात्र बनाये है हमको और यहाँ पैसा नहीँ चलत है इलेक्शन में दूसरी university की तरह l यहाँ डिबेट में स्टूडैंटस को impress करना पड़ता है l
कॉन्सटेबल - तो मतलब सबैइ के सब तुम जैसे है वहाँ l
कन्हैया - तब फिर क्या l ऐसे ही थोड़ी l
कॉन्सटेबल - तो फिर लोग काहे कह रहे थे की दो चार स्टूडैंटस की वजह से पूरे jnu को बदनाम किया जा रहा है l
कन्हैया - अरे तुम स्टूडैंटस की बात छोडो ऊँहा की फेकल्टी न हमरे जैसी है एकैदम।
कॉन्सटेबल - हे राम l मतलब छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ बढ़े मियाँ सुभान अल्लाह l
कन्हैया - त्बैइ तो हमको सपोर्ट कर रहे थे और हमरा जमानत भी दिये रहे
कॉन्सटेबल - भइया ये अफजल से इतना प्रेम काहे है तुमको ?
कन्हैया - अरे दुई चार judge मिलके फाँसी पे टाँग दिये मासूम को l
कॉन्सटेबल - लेकिन फाँसी तो संविधान के तहत हुई थी ना l
कन्हैया - तुम नहीँ समझोगे , तुम बुद्धू हो,अनपढ़ हो , संघी हो, rss के हो bjp के हो, abvp के हो l
कॉन्सटेबल - ठीक है भइया प्रणाम है तुम और तुमहरे जैसे तृतीय श्रेणी के बुधीजीवी छात्रों और फेकल्टी को l

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